झारखंड: थाने में वर्दी पहनकर ‘कपल डांस’ पड़ा महंगा, हुसैनाबाद थानेदार लाइन क्लोज
गणतंत्र दिवस पर थाना परिसर में वर्दी पहनकर पत्नी संग डांस रील बनाना हुसैनाबाद थाना प्रभारी को महंगा पड़ा। वीडियो वायरल होने के बाद पलामू एसपी ने थानेदार को लाइन हाजिर कर दिया और चंदन कुमार को नया प्रभारी नियुक्त किया।
- गणतंत्र दिवस पर पत्नी संग डांस रील वायरल
- पलामू एसपी ने की सख्त कार्रवाई
- चंदन कुमार बने नए थाना प्रभारी
पलामू (Threesocieties.com Desk)। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय और गरिमामय पर्व पर थाना परिसर में वर्दी पहनकर पत्नी के साथ डांस रील बनाना हुसैनाबाद थाना प्रभारी पुलिस इंस्पेक्टर सोनू चौधरी को भारी पड़ गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और मामला सीधे विभागीय कार्रवाई तक पहुंच गया।
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वायरल वीडियो में थाना प्रभारी पुलिस इंस्पेक्टर सोनू चौधरी पुलिस की पूरी वर्दी में अपनी पत्नी के साथ बॉर्डर फिल्म के गीत पर थिरकते नजर आ रहे हैं। वीडियो के एक हिस्से में वे अपनी पत्नी को पुलिस की टोपी पहनाते हुए भी दिखते हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो गणतंत्र दिवस के दिन थाना परिसर में ही शूट किया गया था।
रील के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कुछ लोगों ने इसे निजी खुशी बताते हुए हल्के में लिया, वहीं अधिकांश यूजर्स ने इसे पुलिस अनुशासन और वर्दी की गरिमा का खुला उल्लंघन करार दिया।मामले की गंभीरता को देखते हुए हुसैनाबाद के एसडीपीओ एस. मोहम्मद याकूब (IPS) के नेतृत्व में जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन में वर्दी की मर्यादा और सेवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई, जिसके बाद पलामू एसपी रीष्मा रमेशन ने कड़ा कदम उठाते हुए इंस्पेक्टर सोनू चौधरी को लाइन हाजिर कर दिया।
प्रशासनिक स्तर पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पाटन के अंचल निरीक्षक चंदन कुमार को हुसैनाबाद थाना का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है।पलामू एसपी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस की वर्दी केवल कपड़ा नहीं, बल्कि अनुशासन, जिम्मेदारी और राष्ट्र की प्रतिष्ठा का प्रतीक है। सरकारी परिसर में वर्दी पहनकर व्यक्तिगत मनोरंजन या सोशल मीडिया कंटेंट बनाना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
इस कार्रवाई के जरिए पुलिस विभाग ने साफ संदेश दिया है कि कानून के रखवालों पर भी नियम उतने ही सख्त हैं और अनुशासनहीनता की कीमत पद और प्रतिष्ठा दोनों से चुकानी पड़ सकती है। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह मामला अब पुलिस विभाग में अनुशासन और डिजिटल जिम्मेदारी को लेकर एक अहम उदाहरण बन गया है।






