झारखंड में नक्सलवाद की कमर टूटी! 10 महिला माओवादी समेत 25 खूंखार उग्रवादी करेंगे सरेंडर
झारखंड में अब तक का सबसे बड़ा नक्सली आत्मसमर्पण होने जा रहा है। 10 महिला माओवादियों समेत 25 उग्रवादी गुरुवार को हथियार डालेंगे। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति से सारंडा में माओवादी संगठन कमजोर पड़ गया है।
- झारखंड में अब तक का सबसे बड़ा नक्सली आत्मसमर्पण,
- सारंडा में बचा सिर्फ मिसिर बेसरा
- झारखंड में माओवादियों का नेटवर्क टूटने की कगार पर
रांची (Threesocieties.com Desk) : झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे बड़े अभियान के बीच गुरुवार को इतिहास बनने जा रहा है। राज्य में अब तक का सबसे बड़ा एकल-दिवसीय नक्सली आत्मसमर्पण होने वाला है। सारंडा और आसपास के इलाकों में सक्रिय लगभग 25 खूंखार माओवादी सुरक्षा बलों के सामने हथियार डालेंगे। इनमें 10 महिला माओवादी भी शामिल हैं।
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सूत्रों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादी बड़ी संख्या में आधुनिक हथियार भी जमा करेंगे। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि इस आत्मसमर्पण के बाद सारंडा क्षेत्र में माओवादी संगठन लगभग पूरी तरह टूट जाएगा और एक करोड़ के इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा ही अपने कुछ साथियों के साथ बच जाएगा।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई से कमजोर पड़ा माओवादी नेटवर्क
पिछले एक वर्ष के दौरान सारंडा, चाईबासा और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों ने लगातार बड़े अभियान चलाए हैं। पुलिस, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन की संयुक्त कार्रवाई में दो दर्जन से अधिक माओवादी मारे गए हैं। जंगलों में लगातार बढ़ते दबाव, सप्लाई नेटवर्क टूटने और खुफिया निगरानी के कारण माओवादी संगठन कमजोर होता चला गया। कई इलाकों में सुरक्षाबलों ने अस्थायी बंकर और हथियार भंडार भी नष्ट किए। बताया जा रहा है कि खुद को चारों ओर से घिरता देख अब बड़ी संख्या में माओवादी आत्मसमर्पण की राह चुन रहे हैं।
सरकार की सरेंडर पॉलिसी का असर
झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति भी माओवादियों को मुख्यधारा में लौटाने में अहम भूमिका निभा रही है। सरकार हथियार छोड़ने वाले उग्रवादियों को आर्थिक सहायता, रोजगार प्रशिक्षण और पुनर्वास सुविधाएं दे रही है। हाल ही में गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने मुख्यधारा में लौटे 47 पूर्व नक्सलियों के लिए 68 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की है। अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने इस संबंध में लातेहार और चाईबासा के उपायुक्तों को निर्देश जारी किया है।
47 पूर्व नक्सलियों को मिली आर्थिक सहायता
सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार लातेहार जिले के पांच और चाईबासा जिले के 42 पूर्व नक्सलियों को पुनर्वास राशि दी गई है। कई पूर्व उग्रवादियों को एक लाख से लेकर छह लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की गई है। सरकार का मानना है कि आर्थिक सहायता और पुनर्वास योजनाओं से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
सारंडा में खत्म होने की कगार पर लाल आतंक
सारंडा लंबे समय तक माओवादियों का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन लगातार ऑपरेशन और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के विस्तार के बाद संगठन का प्रभाव तेजी से घटा है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि आने वाले समय में मिसिर बेसरा और उसके बचे हुए साथियों पर भी शिकंजा कस जाएगा। ऐसे संकेत हैं कि वे भी जल्द आत्मसमर्पण कर सकते हैं। राज्य में होने वाला यह ऐतिहासिक आत्मसमर्पण झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।






