SAIL का बड़ा ‘कास्ट कट’ प्लान: 22 हजार ठेका मजदूरों पर गिरी गाज, बोकारो में 2552 की छंटनी तय

SAIL ने 2026-27 तक 22 हजार ठेका श्रमिकों की छंटनी का लक्ष्य तय किया है। बोकारो स्टील प्लांट में 2552 और रिफ्रैक्ट्री यूनिट में 783 मजदूरों पर असर पड़ेगा। फैसले से श्रमिकों में भारी नाराजगी।

SAIL का बड़ा ‘कास्ट कट’ प्लान: 22 हजार ठेका मजदूरों पर गिरी गाज, बोकारो में 2552 की छंटनी तय
सेल में छंटनी का फरमान जारी।

बोकारो (Threesocieties.com Desk): देश की महारत्न कंपनी Steel Authority of India Limited (SAIL) में ठेका श्रमिकों पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 तक बड़े पैमाने पर छंटनी का रोडमैप तैयार किया है। इस फैसले के तहत पूरे SAIL में करीब 22,000 ठेका श्रमिकों की नौकरी पर खतरा पैदा हो गया है।

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कंपनी के निदेशक (कार्मिक) सह कार्यवाहक CMD के.के. सिंह की ओर से जारी निर्देश के बाद सभी यूनिट्स में इस योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 बोकारो में सबसे बड़ा असर

Bokaro Steel Plant में छंटनी का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। 2,552 ठेका श्रमिकों को हटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी  समय सीमा: 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 है। वहीं, SAIL Refractory Unit में भी 783 मजदूरों की छंटनी तय है।

 पूरे SAIL में 20% मैनपावर कट

भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर जैसे प्रमुख इस्पात संयंत्रों में भी ठेका श्रमिकों की संख्या में 20% तक कटौती का लक्ष्य रखा गया है। 2025-26 में पहले ही 18.8% कटौती की जा चुकी है। अब अतिरिक्त 20% कटौती का नया लक्ष्य है।  कुल मिलाकर 22 हजार मजदूरों पर असर पड़ेगा।
आंकड़ों में समझें पूरा प्लान
1 अप्रैल 2025: बोकारो में 12,798 ठेका कर्मी है। लक्ष्य (1 अप्रैल 2027): घटाकर 7,678 करना है। यानी करीब 5,000 की कुल कमी, जिसमें मौजूदा चरण में 2,552 शामिल हैं।  रिफ्रैक्ट्री यूनिट में ठेका मजदूरों की संख्या1,956 से घटाकर 1,173 करने की योजना है।

क्यों लिया गया फैसला?

यह बड़ा निर्णय इस्पात मंत्रालय स्तर की उच्चस्तरीय बैठक के बाद लिया गया है। प्रबंधन के अनुसार मुख्य कारण: लागत नियंत्रण (Cost Cutting), प्रतिस्पर्धा में कंपनी को मजबूत करना व  बहु-कौशल (Multi-Skilling) को बढ़ावादेना। कंपनी का दावा है कि उत्पादन या कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बचे हुए श्रमिकों को मल्टी-स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी।

 मजदूर संगठनों में नाराजगी

इस फैसले के बाद मजदूर संगठनों में भारी नाराजगी है। बीएकेएस के कार्यकारी रणधीर कुमार का कहना है कि “ठेका श्रमिक पहले ही अस्थायी और शोषण का शिकार हैं। अब उनकी नौकरी छीनना हजारों परिवारों के लिए आजीविका संकट खड़ा करेगा।”

क्या बढ़ेगा आंदोलन?

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर छंटनी से श्रमिक असंतोष बढ़ सकता है। यूनियन आंदोलन तेज कर सकती हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक असर पड़ेगा।