राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका, बैजनाथ राम और परिमल नथवाणी जीते; महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल
झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में JMM के बैजनाथ राम और NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी ने जीत दर्ज की। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद महागठबंधन में क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक दरार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
Highlights
- कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा
- बैजनाथ राम को 31 और परिमल नथवाणी को 28 वैध वोट मिले
- तीन वोट अमान्य घोषित होने से बदला चुनावी गणित
- परिमल नथवाणी की जीत के बाद महागठबंधन में क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज
रांची (Threesocieties.com Desk) : झारखंड की राजनीति में गुरुवार का दिन कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी Parimal Nathwani परिमल नथवाणी ने जीत दर्ज कर ली। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार Pranav Jha प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। परिणाम सामने आते ही सत्ता पक्ष की एकजुटता, क्रॉस वोटिंग और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
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करीब दो सप्ताह से चल रही राजनीतिक सरगर्मी और जोड़-तोड़ की अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया। लेकिन नतीजों ने कई नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं। चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिया है कि झारखंड की राजनीति में आने वाले दिनों में गठबंधन की राजनीति नए मोड़ ले सकती है।
ऐसा रहा मतदान का गणित
81 सदस्यीय विधानसभा में हुए मतदान में झामुमो उम्मीदवार Baijnath Ram बैजनाथ राम को सबसे अधिक 31 वैध वोट मिले। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी को कुल 30 वोट मिले थे, लेकिन दो मत अमान्य घोषित होने के बाद उनके खाते में 28 वैध वोट दर्ज किए गए।कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 20 वोट मिले, जिनमें एक वोट रद्द हो गया। कुल तीन मत अमान्य घोषित किए गए। अंतिम परिणाम में बैजनाथ राम 31 वोट और परिमल नथवाणी 28 वोट के साथ विजयी घोषित हुए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार जीत की दौड़ से बाहर हो गए।
महागठबंधन की रणनीति पर उठे सवाल
चुनाव से पहले कांग्रेस और झामुमो दोनों दलों के नेता लगातार दावा कर रहे थे कि इंडिया गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और क्रॉस वोटिंग की कोई संभावना नहीं है। लेकिन नतीजे आने के बाद यह दावा कमजोर पड़ता नजर आया। परिमल नथवाणी की जीत ने यह संकेत दिया कि सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों का समर्थन अपेक्षित दिशा में नहीं गया। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर कांग्रेस उम्मीदवार को पर्याप्त समर्थन क्यों नहीं मिला और किन कारणों से गठबंधन की रणनीति विफल हुई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे आने वाले विधानसभा चुनावों और गठबंधन की भविष्य की रणनीति पर असर डाल सकते हैं।
तीसरी बार राज्यसभा पहुंचे परिमल नथवाणी
देश के प्रमुख उद्योग समूह से जुड़े परिमल नथवाणी का झारखंड से राज्यसभा तक पहुंचने का सफर काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 2008 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे नथवाणी ने 2014 में भी जीत दर्ज की थी। अब तीसरी बार उन्होंने झारखंड से राज्यसभा का चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित कर दी है।राजनीतिक जानकारों के अनुसार, विभिन्न दलों के बीच संवाद स्थापित करने की उनकी क्षमता और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता ने उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार बनाया।
शिक्षक से सांसद तक बैजनाथ राम का सफर
लातेहार जिले के परसही गांव में जन्मे बैजनाथ राम का राजनीतिक जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल माना जाता है। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ वर्षों तक शिक्षक के रूप में कार्य किया। झारखंड राज्य गठन के बाद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2000 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर विधायक बने। बाद में उन्होंने मंत्री पद भी संभाला। भाजपा और फिर झामुमो का सफर तय करते हुए अब वे राज्यसभा सांसद बन गए हैं। उनकी जीत को झामुमो नेतृत्व के लिए भी बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।
झारखंड की राजनीति को मिला नया संदेश
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने साफ संकेत दिया है कि झारखंड की राजनीति में गठबंधन की मजबूती और आंतरिक समीकरण दोनों ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं। एक ओर झामुमो ने अपनी सीट बचाने में सफलता हासिल की, वहीं दूसरी ओर परिमल नथवाणी की जीत ने विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए नए राजनीतिक समीकरणों के द्वार खोल दिए हैं।अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव के बाद महागठबंधन क्रॉस वोटिंग और अंदरूनी असंतोष के आरोपों से कैसे निपटता है तथा आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।






