“थाना प्रभारी ‘भगवान’ न बनें! झारखंड पुलिस एसोसिएशन की सख्त चेतावनी—बदलिए रवैया, नहीं तो होगी कार्रवाई”
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने थाना प्रभारियों के अहंकारी और अशोभनीय व्यवहार पर कड़ी चेतावनी जारी की है। बिचौलियेगिरी, चाटुकारिता और अधीनस्थों के शोषण पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड पुलिस व्यवस्था के भीतर बढ़ते असंतोष और व्यवहारिक शिकायतों के बीच झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के विभिन्न थानों में तैनात थाना प्रभारियों के व्यवहार को लेकर एसोसिएशन ने खुली चेतावनी जारी करते हुए साफ कहा है कि वर्दी की गरिमा बनाए रखें और खुद को ‘भगवान’ समझने की मानसिकता से बाहर आएं।
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अहंकार और दुर्व्यवहार पर सख्त आपत्ति
एसोसिएशन के संयुक्त सचिव सह कोषाध्यक्ष राकेश कुमार पाण्डेय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ थाना प्रभारी अपने ही अधीनस्थ कनीय पदाधिकारियों और बैचमेट्स के साथ अशोभनीय व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई अधिकारी पद मिलते ही संगठन और अनुशासन से ऊपर खुद को समझने लगते हैं, जो पुलिस बल की एकता और मनोबल के लिए बेहद खतरनाक है। कनीय अधिकारियों की समस्याओं को अनसुना करना और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाना, अनुशासनहीनता की चरम सीमा है।
बिचौलियों और चाटुकारिता पर करारा प्रहार
एसोसिएशन ने उन अधिकारियों को भी निशाने पर लिया है जो वरीय अधिकारियों से नजदीकी का फायदा उठाकर “बिचौलिये” की भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक: कुछ सदस्य अपने ही साथियों के शोषण में शामिल हैं। चाटुकारिता के जरिए व्यक्तिगत लाभ लिया जा रहा है। संगठन के मूल्यों को दरकिनार किया जा रहा है। राकेश पाण्डेय ने स्पष्ट कहा—“जब खुद पर आंच आती है, तब ऐसे लोग एसोसिएशन की शरण में आते हैं, लेकिन पद पर रहते हुए संगठन को भूल जाते हैं।”
एसोसिएशन की चेतावनी: सुधर जाएं, नहीं तो कार्रवाई तय
एसोसिएशन ने अपने सदस्यों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं: आज आप प्रभारी हैं, कल आप भी अधीनस्थ होंगे—इसे याद रखें।
सहकर्मियों और आम जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें। शोषण, प्रताड़ना और बिचौलियेगिरी से दूर रहें।
कड़ी चेतावनी
जो भी सदस्य इन गतिविधियों में लिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ साक्ष्यों के साथ उचित मंच पर आवाज उठाई जाएगी। ऐसे लोगों को एसोसिएशन का संरक्षण मिलना मुश्किल होगा।
पुलिस व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
इस सख्त रुख के बाद माना जा रहा है कि झारखंड पुलिस के अंदर अनुशासन और कार्यसंस्कृति को सुधारने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। अगर एसोसिएशन अपने रुख पर कायम रहती है, तो आने वाले दिनों में कई थाना प्रभारियों के व्यवहार में बदलाव देखने को मिल सकता है।






