झारखंड: बोकारो में 74 एकड़ वनभूमि घोटाले का बड़ा खुलासा, कोर्ट ने रद्द की उमायुष मल्टीकॉम की जमाबंदी
बोकारो के तेतुलिया में 74 एकड़ वनभूमि मामले में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज ने उमायुष मल्टीकॉम के नाम की जमाबंदी रद्द कर दी। अदालत ने फर्जी दस्तावेज, अवैध म्यूटेशन और वन संरक्षण अधिनियम उल्लंघन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। मामले की जांच ED और CID भी कर रही है।
- फर्जी नीलामी दस्तावेज, अवैध म्यूटेशन और 103 एकड़ का खेल…बोकारो कोर्ट ने खोला पूरा राज
- वनभूमि पर कब्जे की साजिश बेनकाब, तेतुलिया की 74 एकड़ जमीन वन विभाग की घोषित
रांची/बोकारो(Threesocieties.com Desk): बोकारो के चर्चित तेतुलिया वनभूमि मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उमायुष मल्टीकॉम के नाम पर कायम 74 एकड़ जमीन की जमाबंदी रद्द कर दी है। प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज, बोकारो ने अपने फैसले में साफ कहा कि विवादित जमीन संरक्षित वनभूमि है और इस पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे मालिकाना हक हासिल करने की कोशिश की गई।
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अदालत ने बोकारो वन प्रमंडल पदाधिकारी की अपील पर सुनवाई करते हुए सेटलमेंट ऑफिसर के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत उमायुष मल्टीकॉम के नाम पर जमीन दर्ज की गई थी। कोर्ट ने माना कि पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं, कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी और दस्तावेजों में जालसाजी की गई।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
मामला तेतुलिया मौजा की 74 एकड़ जमीन से जुड़ा है। सेटलमेंट ऑफिसर ने मार्च 2022 में Suit No-4330/2013 की सुनवाई के बाद बोकारो स्टील प्रोजेक्ट (SAIL) का नाम हटाकर उमायुष मल्टीकॉम का नाम दर्ज करने का आदेश दिया था। इतना ही नहीं, जमीन की प्रकृति “जंगल साल” से बदलकर दूसरी श्रेणी में दर्ज कर दी गई और कंपनी के नाम पर जमाबंदी कायम कर दी गई। वन विभाग ने इस आदेश को चुनौती देते हुए प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत में अपील दायर की थी।
कोर्ट ने किन आधारों पर आदेश रद्द किया?
सुनवाई के दौरान अदालत ने कई गंभीर तथ्य पाए—
फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन पर दावा किया गया
पहले खारिज हो चुके मुकदमे को दोबारा गलत तरीके से शुरू किया गया
10 डिसमिल के दावे को बढ़ाकर 103 एकड़ तक पहुंचा दिया गया
पश्चिम बंगाल के पुरूलिया की कथित नीलामी के दस्तावेजों के आधार पर म्यूटेशन कराया गया
बिना केंद्र सरकार की अनुमति जमीन की प्रकृति बदली गई, जो वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है
CNT Act में निर्धारित समय-सीमा के काफी बाद कंपनी को मुकदमे में पक्षकार बनाया गया
अदालत ने कहा कि विवादित जमीन कानूनी रूप से “Protected Forest” है और इसका मालिकाना हक राज्य सरकार तथा वन विभाग के पास ही रहेगा।
SAIL को दी गई थी जमीन
फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि 1962 में यह जमीन बोकारो स्टील प्लांट (SAIL) को सौंप दी गई थी। हालांकि जमीन का वास्तविक टाइटल राज्य सरकार और वन विभाग के पास ही बना रहा।
ED और CID भी कर रही जांच
तेतुलिया वनभूमि खरीद-बिक्री मामले की जांच पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CID कर रही है। ED ने पीएमएलए कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर इजहार अंसारी द्वारा पेश नीलामी दस्तावेजों को फर्जी बताया है। वहीं CID भी पूरे जमीन सौदे और म्यूटेशन प्रक्रिया की जांच में जुटी हुई है।
झारखंड में फिर गरमाया जमीन घोटाले का मुद्दा
अदालत के इस फैसले के बाद झारखंड में वनभूमि और जमीन घोटालों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में वनभूमि से जुड़े मामलों में बड़ा उदाहरण बन सकता है।






