झारखंड में 316 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र, CM हेमंत सोरेन बोले- ‘जिम्मेदारी निभाइए, तभी बदलेगा राज्य’

रांची के प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC द्वारा चयनित 316 सहायक आचार्यों और 17 महिला पर्यवेक्षिकाओं को नियुक्ति पत्र सौंपा। इस दौरान उन्होंने कुपोषण, महिला सशक्तिकरण, मैया सम्मान योजना, सरकारी स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता और रोजगार के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया।

झारखंड में 316 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र, CM हेमंत सोरेन बोले- ‘जिम्मेदारी निभाइए, तभी बदलेगा राज्य’
दुर्गम इलाकों से मत भागिए,शिक्षकों को नसीहत।
  • गांव-गांव जाकर बदलें बच्चों का भविष्य
  • दो लाख युवाओं को मिला काम
  • ‘कुपोषण झारखंड पर काला धब्बा’ 
  • नियुक्ति पत्र बांटते हुए भावुक हुए CM हेमंत सोरेन

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की राजधानी रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन सभागार सोमवार को उस समय उत्साह और उम्मीदों से भर गया, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा चयनित 316 सहायक आचार्यों और 17 महिला पर्यवेक्षिकाओं को नियुक्ति पत्र सौंपा। कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र पाते ही चयनित अभ्यर्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित शिक्षकों और महिला पर्यवेक्षिकाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य का भविष्य अब उनके कंधों पर है और जिम्मेदारी के साथ काम करके ही झारखंड को नई दिशा दी जा सकती है।

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कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों को मिली जिम्मेदारी

सरकार की ओर से नियुक्त किए गए 316 सहायक आचार्यों में कक्षा 1 से 5 तक के लिए 160 अभ्यर्थी और कक्षा 6 से 8 तक के लिए 156 अभ्यर्थी शामिल हैं। इसके अलावा 17 महिला पर्यवेक्षिकाओं को भी सामाजिक सुरक्षा और बाल विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही मार्गदर्शन और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे नौकरी को केवल रोजगार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मिशन समझें।

‘कुपोषण झारखंड पर काला धब्बा’

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य में कुपोषण की समस्या पर भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि झारखंड में कुपोषण एक अभिशाप और “काला धब्बा” बन चुका है। यह समस्या बच्चों के जन्म के साथ ही उनके भविष्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और नई नियुक्त महिला पर्यवेक्षिकाओं की भूमिका इसमें बेहद महत्वपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि गांव-गांव जाकर बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मैया सम्मान योजना की सफलता का जिक्र

मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की महत्वाकांक्षी “मैया सम्मान योजना” का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य की लगभग 50 से 60 लाख महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता सीधे उनके खातों में भेजी जा रही है। उन्होंने एक प्रेरणादायक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि इसी योजना की मदद से एक अनाथ बच्ची ने पढ़ाई जारी रखी और आज डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंच गई।हेमंत सोरेन ने कहा कि यह योजना सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन चुकी है।

सरकारी स्कूलों पर बढ़ा भरोसा

मुख्यमंत्री ने राज्य के “मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों” की बढ़ती लोकप्रियता को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में केवल 10,900 सीटों के लिए इस बार 35 हजार से 40 हजार तक आवेदन आए हैं। यह इस बात का संकेत है कि अब लोगों का भरोसा सरकारी स्कूलों की ओर फिर से लौट रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में झारखंड शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।

महिलाओं से बोले- घर की चारदीवारी से बाहर निकलें

महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे नहीं बढ़ेंगी, तब तक राज्य और देश का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें सामाजिक व आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है। महिला पर्यवेक्षिकाओं को उन्होंने समाज में बदलाव की मजबूत कड़ी बताया।

दुर्गम क्षेत्रों में सेवा से न भागें शिक्षक

मुख्यमंत्री ने कुछ शिक्षकों की मानसिकता पर चिंता जताते हुए कहा कि अक्सर देखा जाता है कि शिक्षक ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में सेवा देने से बचते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिम्मेदारियों से भागकर विकास संभव नहीं है। उन्होंने नए शिक्षकों से अपील की कि वे सुदूर क्षेत्रों में जाकर बच्चों को बेहतर शिक्षा दें और उनके भविष्य को संवारने में अपनी पूरी भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक शिक्षक समाज को बदलने की सबसे बड़ी ताकत होता है।

केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के रोजगार संकट और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को भी घेरा। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण युवा परेशान हैं, जबकि झारखंड सरकार ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्रों में करीब डेढ़ से दो लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है।उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार युवाओं को रोजगार देने के लिए लगातार काम कर रही है और आने वाले समय में भी नियुक्तियों का सिलसिला जारी रहेगा।

‘शिक्षक शिल्पकार की तरह समाज गढ़ते हैं’

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक किसी भी बच्चे को तराशकर उसे बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक शिल्पकार लकड़ी को खूबसूरत आकार देता है, उसी तरह शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देते हैं। मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त शिक्षकों और महिला पर्यवेक्षिकाओं से पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ काम करने की अपील की।