राबड़ी ने लौटाई पूरी सुरक्षा, तेजस्वी भी नाराज! बिहार में सुरक्षा कटौती पर सियासी बवाल
बिहार में सुरक्षा कटौती को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राबड़ी देवी ने अपने आवास से सभी सुरक्षाकर्मी वापस भेज दिए, जबकि तेजस्वी यादव ने भी सुरक्षा लौटाने का फैसला लिया है। RJD ने इसे राजनीतिक दुर्भावना और अपमान बताया है।
HighLights
- राबड़ी देवी ने सुरक्षा कटौती के विरोध में बंगले से हटाए सभी सुरक्षाकर्मी
- तेजस्वी यादव ने भी सुरक्षा वापस करने का लिया फैसला
- RJD ने सरकार पर लगाया राजनीतिक प्रतिशोध और अपमान का आरोप
- सुरक्षा समीक्षा के बाद लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में किया गया बदलाव
- बिहार की राजनीति में सुरक्षा बनाम सम्मान पर छिड़ी नई बहस
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति में एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा में कटौती के फैसले के बाद सियासी माहौल गर्म हो गया है। सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव से नाराज राबड़ी देवी ने अपने सरकारी आवास से तैनात सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेज दिया, जबकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी सुरक्षा लौटाने का फैसला कर सरकार
यह भी पढ़ें: बिहार: क्या मंत्री पद से जाएगी कुर्सी? BJP की दो सूचियों से गायब रहे उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब सरकारी आवास और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही लालू परिवार और सरकार के बीच राजनीतिक तनाव बना हुआ है। अब सुरक्षा कटौती के मुद्दे ने इस टकराव को और बढ़ा दिया है।
बंगले से हटाए गए सभी सुरक्षाकर्मी
राबड़ी देवी ने अपने आवास पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों और सुरक्षा कर्मियों को हटाने का निर्देश दिया। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था में कटौती को उन्होंने केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा। राजद नेताओं का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों की गरिमा के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए और इसमें कटौती कर सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है।
तेजस्वी यादव ने भी दिखाई नाराजगी
राजद के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि तेजस्वी यादव ने भी अपनी सुरक्षा वापस करने का निर्णय लिया है। तेजस्वी यादव को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है और उनके पटना पहुंचने के बाद इस फैसले पर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकती है।राजद का कहना है कि यदि परिवार के किसी सदस्य को कोई नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि जनता इसे सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा मान रही है।
4 जून की बैठक के बाद हुआ बदलाव
जानकारी के अनुसार, 4 जून को हुई राज्य सुरक्षा समिति की बैठक के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई थी। इसके बाद लालू परिवार के कई सदस्यों की सुरक्षा में बदलाव किया गया। नई व्यवस्था के तहत पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को पहले प्राप्त उच्च श्रेणी की सुरक्षा में बदलाव करते हुए सीमित सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए गए। हालांकि सरकार की ओर से इसे नियमित सुरक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
RJD बोली- यह राजनीतिक दुर्भावना
राजद ने इस फैसले को सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बिहार में कई ऐसे लोगों को भारी सुरक्षा मिली हुई है जिनकी सार्वजनिक पहचान सीमित है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा कम की जा रही है। शक्ति सिंह यादव ने कहा कि लालू प्रसाद केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की विचारधारा का चेहरा हैं और उनकी सुरक्षा को राजनीति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
बिहार की राजनीति में बढ़ सकती है बहस
सुरक्षा कटौती और उसे लौटाने के फैसले के बाद बिहार की राजनीति में अब नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इसे सम्मान और राजनीतिक प्रतिशोध का मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विधानसभा चुनाव की राजनीति में भी बड़ा विषय बन सकता है।






